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रेल मंत्रालय

बिहार में यात्रियों के फायदे के लिए नई लाइनों और विद्युतीकरण परियोजनाओं का उद्घाटन किया

पीएम ने कोविड काल में बिना रुके काम करने के लिए रेलवे की प्रशंसा की
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विद्युतीकरण, स्वच्छता प्रयासों, किसान रेल की शुरुआत और मानवरहित रेल क्रासिंग खत्म करने में मिली सफलताओं के लिए रेलवे की प्रशंसा की
प्रविष्टि तिथि: 18 SEP 2020 5:14PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से ऐतिहासिक कोसी रेल महासेतु को राष्ट्र को समर्पित किया और यात्रियों के लाभ के लिए बिहार में नई रेल लाइनों और विद्युतीकरण परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया।

इस मौके पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बिहार में रेल संपर्क के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा गया है। उन्होंने कहा कि आज कोसी महासेतु और किऊल ब्रिज के उद्घाटन, विद्युतीकरण परियोजनाएं, रेलवे में मेक इन इंडिया के प्रोत्साहन और नए रोजगार पैदा करने वाली एक दर्जन परियोजनाओं को मिलाकर लगभग 3000 करोड़ रुपये की परियोजनों की शुरुआत की गई है। ये परियोजनाएं न केवल बिहार के रेल नेटवर्क को, बल्कि पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए रेल संपर्क को भी मजबूत करेंगी।

इस ऐतिहासिक अवसर पर बिहार के राज्यपाल श्री फागू चौहान, बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री, रेल व वाणिज्य और उद्योग मंत्री मंत्री श्री पीयूष गोयल, विधि और न्याय व संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन मंत्री श्री गिरिराज सिंह, गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय और बिहार के उपमुख्यमंत्री श्री सुशील मोदी मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री ने कोसी रेल महासेतु के अलावा बिहार राज्य के फायदे के लिए यात्री सुविधाओं से जुड़ी अन्य रेल परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया। इनमें शामिल हैं-

• बरौनी में नया इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव शेड

• किउल नदी पर एक नया रेलवे पुल

• विद्युतीकरण की पांच परियोजनाएं: मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी, कटिहार-न्यू जलपाईगुड़ी, समस्तीपुर-दरभंगा-जयनगर, समस्तीपुर-खगड़िया, भागलपुर-शिवनारायणपुर खंड पर।

• करनौटी- बख्तियारपुर लिंक बाईपास और बरह-बख्तियारपुर के बीच तीसरी रेललाइन

• किऊल नदी के ऊपर नया पुल और इलेक्ट्रिक इंटरलॉकिंग

Rail News
Oct 07 (22:06)
Rang De Basanti^   45183 blog posts
Re# 4737488-1            Tags   Past Edits
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प्रधानमंत्री ने बिहार के लोगों को नई और आधुनिक सुविधाओं के लिए बधाई दी, जिससे बिहार समेत पूर्वी भारत के रेलयात्रियों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि बिहार में नदियों के जाल की वजह से इसके कई हिस्से एक-दूसरे से कटे हुए हैं और इसके कारण लोगों को लंबी-लंबी यात्राएं करनी पड़ती हैं। उन्होंने कहा कि चार साल पहले इस समस्या को दूर करने के लिए पटना और मुंगेर में दो महासेतुओं को बनाया गया था। अब इन दोनों रेल पुलों के चालू होने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच सफर आसान हुआ है और इससे खास तौर पर उत्तर बिहार के विकास को नई गति मिली है।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि साढ़े आठ दशक पहले आए भूकंप ने मिथिला और कोसी क्षेत्र को अलग कर दिया गया और यह एक संयोग है कि कोरोना जैसे महामारी के बीच में दोनों क्षेत्रों को जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज सुपौल-आसनपुर-कूप रेलमार्ग को इसके निर्माण में शामिल रहे प्रवासी मजदूरों की कड़ी मेहनत की वजह से देश को समर्पित किया गया है। उन्होंने कहा कि मिथिला और कोसी क्षेत्र के लोगों की समस्याएं दूर करने के लिए इस नई कोसी रेललाइन की परिकल्पना 2003 में की गई थी, जब श्री अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे और श्री नीतीश कुमार की रेल मंत्री थे। उन्होंने कहा कि इस सरकार के समय इस परियोजना में तेजी से काम हुआ और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके सुपौल-आसनपुर कुपहा मार्ग का काम पूरा किया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज कोसी महासेतु से होकर सुपौल-आसनपुर के बीच शुरू होने वाली नई रेल सेवा से सुपौल, अररिया और सहरसा जिले के लोगों को बहुत ज्यादा फायदा होगा। यह पूर्वोत्तर के लोगों के लिए भी एक वैकल्पिक रास्ता बनेगा। उन्होंने कहा कि इस महासेतु के निर्माण से 300 किलोमीटर लंबा सफर सिर्फ 22 किलोमीटर में सिमट गया है, इससे पूरे इलाके में व्यापार और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे बिहार के लोगों का समय और पैसा दोनों ही बचेगा.

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोसी महासेतु की तरह इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सुविधा के साथ किउल नदी पर एक नया रेलमार्ग बनने से इस पूरे रेल मार्ग पर ट्रेनें 125 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि इस इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सुविधा के बनने से हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेललाइन पर ट्रेनों की आवाजाही में भी कमी आएगी, जिससे बेवजह देरी से राहत मिलेगी और यात्रा भी सुरक्षित होगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 6 वर्षों से भारतीय रेलवे को नए भारत की आकांक्षाओं के अनुरूप ढालने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज भारतीय रेलवे पहले से कहीं ज्यादा साफ-सुथरी है। उन्होंने आगे कहा कि ब्रॉड गेज रेललाइनों से मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग को हटाकर भारतीय रेलवे को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित बनाया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे की रफ्तार भी बढ़ी है। वंदे भारत जैसी मेड इन इंडिया ट्रेनें आत्मनिर्भरता और आधुनिकता का एक प्रतीक हैं और रेल नेटवर्क का हिस्सा बन रही हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि रेलवे में आधुनिकीकरण की कोशिशों से बिहार को काफी फायदा मिल रहा है। पिछले कुछ वर्षों में मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए मधेपुरा में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव (इलेक्ट्रिक रेलइंजन कारखाना) और मारहौरा में डीजल लोकोमोटिव को बनाया गया है। इन दोनों परियोजनाओं में लगभग 44000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों को इस बात का गर्व होगा कि भारत में सबसे शक्तिशाली इलेक्ट्रिक इंजन- 12000 हॉर्स पावर, बिहार में बनता है। बिहार के पहले लोको शेड ने भी काम करना शुरू कर दिया है, जहां इलेक्ट्रिक इंजनों की देखभाल की जाती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज बिहार में लगभग 90% रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण हो चुका है। उन्होंने कहा कि बिहार में पिछले 6 वर्षों में 3000 किलोमीटर से अधिक रेलवे का विद्युतीकरण किया गया है। उन्होंने कहा कि बिहार में 2014 के पहले के 5 वर्षों में लगभग 325 किलोमीटर नई रेललाइनें चालू की गईं, जबकि 2014 के बाद 5 वर्षों में बिहार में लगभग 700 किलोमीटर नई रेल लाइनें चालू की गईं, जो पहले के मुकाबले लगभग दोगुनी है। उन्होंने आगे कहा कि अभी 1000 किलोमीटर नई रेललाइनों को बनाने का काम जारी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हाजीपुर-घोसवार-वैशाली रेललाइन की शुरुआत होने के साथ दिल्ली और पटना सीधी रेल सेवा से जुड़ जाएंगे। इस सेवा से वैशाली में पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलेगा और नई नौकरियां भी पैदा होंगी। उन्होंने कहा कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर काम तेज गति से चल रहा है और इस कॉरिडोर का लगभग 250 किमी हिस्सा बिहार में पड़ेगा। इस परियोजना के पूरा होने के बाद सवारी गाड़ियों में देरी की समस्या कम हो जाएगी और माल ढुलाई में देरी की समस्य भी काफी हद तक दूर हो जाएगी।

प्रधानमंत्री ने कोरोना के संकट के दौरान अथक परिश्रम करने के लिए रेलवे की सराहना की। उन्होंने कहा कि रेलवे ने प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने और उन्हें श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के जरिए वापस लाने में प्रमुख भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में बिहार और महाराष्ट्र के बीच देश की पहली किसान रेल शुरू की गई है.

इस मौके पर रेल और वाणिज्य व उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में कोसी महासेतु का निर्माण कार्य पूरा किया गया है। उन्होंने कहा कि यह महासेतु बिहार की कृषि और अर्थव्यवस्था के विकास के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा। मंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे बिहार के विकास में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने परियोजना को पूरा करने और राज्य में विकास की दूसरी पहल करने के लिए भारतीय रेलवे का आभार जताया। सीएम बिहार ने घरों को लौटने वाले बिहार मूल के लोगों की मदद करने के लिए विपरीत हालात के बावजूद ट्रेनें चलाने के लिए रेलवे को विशेष तौर पर धन्यवाद दिया।

कोसी रेल महासेतु को राष्ट्र के लिए समर्पित किया जाना बिहार के लिए ऐतिहासिक पल है और इससे पूरा क्षेत्र पूर्वोत्तर से जुड़ रहा है । 1887 में निर्मली और भपटियाही (सरायगढ़) के बीच एक मीटर गेज लिंक बना था। 1934 में भारी बाढ़ और इंडो-नेपाल भूकंप में तबाह हो गया था। इसके बाद कोसी नदी के रास्ता बदलने वाले स्वभाव की वजह से लंबे समय तक इस रेल लिंक को दोबारा बनाने का कोई प्रयास ही नहीं किया गया।

भारत सरकार ने कोसी मेगा ब्रिजलाइन परियोजना को 2003-04 में मंजूरी दी थी। कोसी रेल महासेतु 1.9 किलोमीटर लंबा है और इसकी निर्माण लागत 516 करोड़ रुपये है। भारत-नेपाल सीमा के साथ बना यह पुल सामरिक महत्व भी है। इस परियोजना को कोविड महामारी के दौरान पूरा किया गया, जिसे पूरा करने में प्रवासी श्रमिकों ने भी योगदान दिया। इस परियोजना का उद्घाटन इलाके के लोगों के 86 साल पुराने सपने और लंबे इंतजार को पूरा करेगा।

महासेतु को समर्पित करने के साथ प्रधानमंत्री ने सुपौल स्टेशन से सुपौल-राघोपुरा डेमू ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। एक बार नियमित ट्रेन सेवा शुरू होने के बाद यह सुपौल, अररिया और सहरसा जिलों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगी। इससे इलाके के लोगों के लिए कोलकाता, दिल्ली और मुंबई के लिए लंबी दूरी की यात्रा आसान हो जाएगी।

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एमजी/एएम/आरकेएस/एसएस



(रिलीज़ आईडी: 1656457) आगंतुक पटल : 28
Oct 07 (21:57) भारतीय रेलवे ने यूजर डिपो मॉड्यूल (यूडीएम) की शुरुआत की (pib.gov.in)
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रेल मंत्रालय

यह मैनुअल वर्किंग से डिजिटल वर्किंग में रूपांतरण करते हुए सभी हितधारकों के साथ लेन-देन एवं ऑनलाइन सूचनाओं के आदान-प्रदान में तेजी लाएगा

यह यूजर डिपो समेत संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला में
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डिजिटलीकरण को सुनिश्चित करेगा
प्रविष्टि तिथि: 28 SEP 2020 5:59PM by PIB Delhi
सीआरआईएस (सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम) द्वारा विकसित किए गए यूजर डिपो मॉड्यूल (यूडीएम) को श्री पी.सी. शर्मा, सदस्य (टी एंड आरएस) द्वारा 28 सितम्बर 2020 को पश्चिम रेलवे के सभी यूजर डिपो के लिए डिजिटल रूप में शुरू किया।

इस प्रणाली को जल्द ही भारतीय रेलवे के सभी क्षेत्रों में लागू किया जाएगा। स्टोर डिपो तक रेलवे की आपूर्ति श्रृंखला का पहले ही डिजिटलीकरण किया जा चुका है, हालांकि यूजर के स्तर पर गतिविधियां मैनुअल रूप से ही की जा रही हैं। इस प्रणाली के कार्यान्वित होने से मैनुअल वर्किंग से डिजिटल वर्किंग में रूपांतरण से सभी हितधारकों के साथ लेन-देन एवं ऑनलाइन सूचनाओं के आदान-प्रदान में तेजी आएगी। इसके माध्यम से यूजर डिपो सहित पूरे सप्लाई चेन का डिजिटलीकरण सुनिश्चित होगा।

इस प्रणाली के द्वारा विकसित परिसंपत्ति प्रबंधन के अलावा अर्थव्यवस्था, दक्षता और पारदर्शिता में सुगमता आएगी। यह उन्नत सेवा स्तर और ग्राहकों की संतुष्टि को भी सुनिश्चित करेगा।

एमजी/एएम/एके/एसके



(रिलीज़ आईडी: 1659836) आगंतुक पटल : 69
रेल मंत्रालय

सितंबर 2020 में की गई माल ढुलाई पिछले वर्ष की तुलना में 15.3 प्रतिशत अधिक है

माल ढुलाई और राजस्व में सर्वांगीण वृद्धि
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क्षेत्रीय स्तर पर व्यावसायिक विकास इकाइयों का गठन, विशेषीकृत पार्सल और किसान ट्रेनों को चलाने की स्वीकृति तथा विकास को सुनिश्चित करने के लिए बेहतर चौतरफा निगरानी जैसे कई कार्य किए गए

भारतीय रेलवे द्वारा माल ढुलाई को आकर्षक बनाने के लिए कई छूट और रियायतें भी दी जा रही है

प्रविष्टि तिथि: 01 OCT 2020 5:30PM by PIB Delhi
भारतीय रेलवे ने एक उल्लेखनीय सफलता अर्जित करते हुए कोविड से संबंधित चुनौतियों के बावजूद पिछले वर्ष की तुलना में सितंबर के महीने में अधिक राजस्व अर्जित किया है।

रेलवे ने सितंबर 2020 में माल ढुलाई से 9896.86 करोड़ रुपये कमाए, जोकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में (8716.29 करोड़ रुपये) की तुलना में 1180.57 करोड़ रुपये अधिक है। माल ढुलाई राजस्व में 13.54 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

यहां पर यह ध्यान देने वाली बात है कि माल ढुलाई के रुझान आर्थिक गतिविधियों की व्यापक प्रवृत्तियों को अच्छी तरह से दर्शाते हैं।

मिशन मोड पर काम करते हुए, भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई को बहुत आगे ले जाने का एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2020 में सितंबर के महीने में रेलवे द्वारा माल लदान और माल ढुलाई का राजस्व पिछले साल सितम्बर की माल ढुलाई और राजस्व से कहीं अधिक है।

सितंबर 2020 के महीने में भारतीय रेलवे ने 102.12 मिलियन टन माल ढुलाई की, जो पिछले साल के इसी महीने (88.53 मिलियन टन) के माल ढुलाई की तुलना में 13.59 मिलियन टन अधिक है।

रेलवे ने सितंबर 2020 में माल ढुलाई से 9896.86 करोड़ रुपये कमाए, जोकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में अर्जित किए गए 8716.29 करोड़ रुपये की तुलना में 1180.57 करोड़ रुपये अधिक है। वहीं माल ढुलाई में 13.54 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

सितंबर 2020 के महीने में भारतीय रेलवे द्वारा की गई माल ढुलाई का कुल भार 102.12 मिलियन टन था जिसमें 42.89 मिलियन टन कोयला, 13.53 मिलियन टन लौह अयस्क, 6.3 मिलियन टन खाद्यान्न, 5.34 मिलियन टन उर्वरक, 6.05 मिलियन टन सीमेंट (धातुमल को छोड़कर), 3.85 मिलियन टन धातुमल और 3.52 मिलियन टन खनिज तेल शामिल था।

यहां पर महत्वपूर्ण बात यह है कि माल ढुलाई में सुधार को संस्थागत रूप दिया जाएगा और इसे आगामी शून्य आधारित समय सारणी में जोड़ा जाएगा।

उल्लेखनीय है कि भारतीय रेलवे द्वारा माल ढुलाई को आकर्षक बनाने के लिए कई छूट और रियायतें भी दी जा रही है।

कोविड-19 के संकटकाल में भारतीय रेलवे ने इस समय का उपयोग हर प्रकार की दक्षता और अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए किया है।

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एमजी/एएम/एनकेएस/एसके



(रिलीज़ आईडी: 1660876) आगंतुक पटल : 24
रेल मंत्रालय

पूर्व-पश्चिम मेट्रो सेवा का फूलबागान तक विस्तार
प्रविष्टि तिथि: 04 OCT 2020 6:57PM by PIB Delhi
केन्द्रीय रेल, वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज यानी 04 अक्टूबर, 2020 को
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पूर्व-पश्चिम मेट्रो के फूलबागान मेट्रो स्टेशन का उद्घाटन किया। श्री गोयल ने वीडियो लिंक के जरिए फूल बागान के नए स्टेशन से पहली ट्रेन को रवाना किया। अपने संबोधन में कोविड-19 महामारी के बीच फूलबागान स्टेशन का कार्य पूरा करने के लिए की गई अतिरिक्त पहल के लिए सभी को बधाई देते हुए श्री गोयल ने कहा कि सॉल्ट लेक स्टेडियम से लेकर फूलबागान (1.665 किलोमीटर की दूरी) तक मेट्रो के विस्तार से रोज आने-जाने वाले लोगों को इसके सियालदह स्टेशन के नदजीक होने के कारण काफी मदद मिलेगी। इसे दुर्गा पूजा का उपहार बताते हुए उन्होंने कहा कि कोलकाता में मेट्रो सबसे सुरक्षित, सबसे स्वच्छ और परिवहन की सबसे तेज व्यवस्था है।

उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि भूमि उपलब्ध करा दी जाए और अतिक्रमण को समाप्त कर दिया जाए तो किसी भी रेल परियोजना के कार्यान्वयन में धनराशि बाधा नहीं बनेगी।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री बाबुल सुप्रियो ने रेलवे और वाणिज्य तथा उद्योग मंत्री को इस आधुनिक और खूबसूरत फूलबागान मेट्रो स्टेशन को इतनी जल्दी तैयार करने के लिए की गई पहल के लिए बधाई दी। उऩ्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले दिनों में पूर्व-पश्चिम मेट्रो के इस विस्तार के कारण लोग सियालदह स्टेशन आसानी से आ-जा सकेंगे।

इस कार्यक्रम में महिला और बाल विकास राज्य मंत्री सुश्री देबाश्री चौधरी भी उपस्थित थीं। उन्होंने फूलबागान स्टेशन के चालू होने पर प्रसन्नता व्यक्त की।

मेट्रो रेलवे के महाप्रबंधक श्री मनोज जोशी ने अपने उद्घाटन भाषण में बताया कि किस प्रकार की इस स्टेशन के खुलने से मेट्रो यात्रियों को सॉल्ट लेक सेक्टर-5 में आईटी केन्द्र, अंतर्राष्ट्रीय बस टर्मिनल और करुणामयी में मेला ग्राउंड, सेंट्रल पार्क में महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों तथा प्रसिद्ध विवेकानंद युवा भारती क्रीरंगन (सॉल्ट लेक स्टेडियम) पहुंचने में सुविधा होगी।

इस परियोजना की कुल लंबाई 16.5 किलोमीटर है और इस पर कुल अनुमानित लागत 8574.98 करोड़ रुपये आई है। यह हुगली नदी के पश्चिमी तट पर हावड़ा को पूर्वी तट पर सॉल्ट लेक सिटी से जोड़ेगी।

सॉल्ट लेक स्टेडियम से सॉल्ट लेक सेक्टर-5 तक पूर्व-पश्चिम मेट्रो के पहले चरण का उद्घाटन माननीय रेल, वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने 13 फरवरी, 2020 को किया था।

फूलबागान स्टेशन से व्यवसायी सेवाएं 05 अक्टूबर 2020 (सोमवार) से शुरू होंगी। सॉल्ट लेक सेक्टर-5 से फूलबागान के लिए 30 मिनट के अंतराल पर सुबह 8 बजे से रात 07.50 मिनट तक रोजाना 48 सेवाएं चलेंगी। अंतिम सेवा सॉल्ट लेक सेक्टर-5 और फूलबागान स्टेशन से रात 07.30 बजे शुरू होगी। रविवार को कोई सेवा नहीं होगी।

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एमजी/एएम/केपी/डीए/एसके



(रिलीज़ आईडी: 1661632) आगंतुक पटल : 56
रेल मंत्रालय
प्रविष्टि तिथि: 05 OCT 2020 6:44PM by PIB Delhi
माननीय रेल, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने 05 अक्टूबर, 2020 को अपराह्न 03.15 बजे वीडियो लिंक के माध्यम से ’नौगढ़ रेलवे स्टेशन का सिद्धार्थनगर’ रेलवे स्टेशन में परिवर्तित नाम का लोकार्पण किया।
इस अवसर पर वीडियो लिंक के माध्यम से सम्बोधित करते हुये रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल ने
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कहा कि नौगढ़ के समीप लुम्बिनी में महात्मा बुद्ध का जन्म होने एवं इस क्षेत्र से उनके जीवन घटनाओं से जुड़े होने के कारण जन-आकांक्षाओं को देखते हुये नौगढ़ रेलवे स्टेशन का नाम सिद्धार्थनगर रखा गया। इसके लिये उन्होंने सभी को बधाई दी। यहां बौद्ध तीर्थयात्री काफी संख्या में लुम्बनी के लिये आते है। इस क्षेत्र को यूनेस्को द्वारा वल्र्ड हेरिटेज साइट घोषित किया गया है। खलीलाबाद से बहराइच वाया डुमरियागंज-उतरौला-बलरामपुर-श्रावस्ती 240 किमी. लम्बी नई रेल लाइन निर्माण को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के पूरा होने से सन्त कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, बहराइच एवं गोण्डा जनपदों के विकास में तेजी आयेगी।

श्री गोयल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले छः वर्षों में 460 किमी. नई रेल लाइन निर्माण, 531 किमी. दोहरीकरण तथा 489 किमी. आमान परिवर्तन का कार्य पूरा किया गया। इसी प्रकार 4682 किमी. रेलपथ का विद्युतीकरण भी पूरा किया गया। इससे रेल गाड़ियों को तेज गति से चलाया जा सकेगा तथा पर्यावरण भी संरक्षित रहेगा। अनारक्षित समपारों पर होने वाली दुर्घटनाओं को रोकनेे के लिये उत्तर प्रदेश में सभी 1404 अनारक्षित समपारों को समाप्त किया गया। श्री गोयल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले छः वर्षों में आधारभूत संरचना के विकास हेतु रू. 10 हजार 6 सौ करोड़ का आवंटन किया जो उससे पूर्व के वर्षों से लगभग नौगुना अधिक है।

रेल मंत्री ने कहा कि वैष्विक महामारी कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिये देशव्यापी लाॅकडाउन के कारण यात्री गाड़ियों का संचलन बन्द करना पड़ा, परन्तु देश में खाद्य एवं अन्य आवष्यक सामग्रियों की आपूर्ति के लिये मालगाड़ियों एवं पार्सल गाड़ियों का संचलन निर्बाध रूप से जारी रहा, जिससे लोगों तक आवष्यक सामग्रियों की आपूर्ति हो सकी तथा बिजली घरों को कोयला पहुॅच सका। प्रवासी श्रमिकों एवं अन्य यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिये श्रमिक विशेषगाड़ियों का संचलन आरम्भ किया गया। उत्तर प्रदेश में कुल 1661 श्रमिक विशेषगाड़ियाँ आईं, जिनके माध्यम से लगभग 22 लाख 40 हजार यात्री यहाँ आये। उत्तर प्रदेश से भी 191 श्रमिक विशेषगाड़ियों के माध्यम से 2 लाख 50 हजार यात्री विभिन्न राज्यों को भेजे गये। उत्तर प्रदेश में 270 रेल कोच को कोविड केयर कोच में परिवर्तित कर विभिन्न स्टेशनोंपर रखा गया है। रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे चिकित्सालय में 6 कोविड लेवल-। एवं 5 लेवल-2 का वार्ड बनाकर कोविड मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 67 रेल परियोजनाओं में यहाँ आये प्रवासी श्रमिकों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।

रेल मंत्री ने कहा कि माल लदान में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। सितम्बर, 2020 में लोडिंग पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 80 प्रतिषत अधिक है। इस अवसर पर सांसद श्री जगदम्बिका पाल ने रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल को हार्दिक धन्यवाद देते हुये कहा कि रेल के माध्यम से विकास का कार्य तेजी से किया जा रहा है। रेल मंत्री ने कहा कि माडर्न रेल कोच फैैक्ट्री, रायबरेली में अन्त्योदय, हमसफर, दीनदयालु एवं एलएचबी कोच बनाये जा रहे है और फैक्ट्री ने गत वर्ष कोचों का उत्पादन दोगुना कर दिया जो अपने आप में एक रिकार्ड है।

इस अवसर पर सांसद श्री जगदम्बिका पाल ने रेलमंत्री श्री पीयूष गोयल को हार्दिक धन्यवाद देते हुए कहा कि जनआकाक्षंाओं को देखते हुए नौगढ़ स्टेशन का नाम सिद्धार्थनगर किया गया। इससे वर्षों से क्षेत्रीय जनता की बहुप्रतिक्षित मांग पूरी हुई। उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र गौतम बुद्ध के बाल्यावस्था की घटनाओं से जुड़ा है। श्री पाल ने कहा कि रेलवे ने लाॅकडाउन के दौरान श्रमिक विशेषगाड़ियां चलाकर प्रवासी श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुॅचाया। पाॅच हजार कोचों को कोविड केयर कोच में परिवर्तित किया गया। खलीलाबाद-बहराइच नई लाइन (240 किमी.) निर्माण को स्वीकृति प्रदान की गयी है। इससे क्षेत्र के चार आकांक्षी जिलों के विकास को गति मिलेगी। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय जनता की मांगों से रेल मंत्री को अवगत कराया।

अतिथियों का स्वागत करते हुये मण्डल रेल प्रबन्धक/लखनऊ डा0 मोनिका अग्निहोत्री ने कहा कि क्षेत्रीय जनता की मांग को देखते हुये जिला मुख्यालय स्टेशन नौगढ़ रेलवे स्टेशन का नाम सिद्धार्थनगर रखा गया है। यह क्षेत्र ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक रूप से काफी समृद्ध है। इस स्टेशन पर आदर्ष स्टेशन के अनुरूप सभी यात्री सुविधाएं उपलब्ध करा दी गयी है। कार्यक्रम को यू-ट्यूब के माध्यम से लाइव प्रसारण किया गया।

इस अवसर पर वेब लिंक के माध्यम से विधायक श्री श्याम धनी, पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबन्धक श्री एल.सी.त्रिवेदी एवं वरिष्ठ रेल अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री पंकज कुमार सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन अपर मण्डल रेल प्रबन्धक/परिचालन श्री षिषिर सोमवंषी ने किया।
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डीजेएन / एमकेवी
(रिलीज़ आईडी: 1661800) आगंतुक पटल : 283
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